
रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी अनिल टुटेजा को नियमित जमानत दे दी है। लंबे समय से जेल में बंद टुटेजा के लिए यह एक बड़ी राहत जरूर है, लेकिन अदालत ने उन्हें जेल से बाहर आने के लिए बेहद कड़ी और सख्त शर्तों के जाल में बांध दिया है…
शर्तें ऐसी कि छत्तीसगढ़ में नहीं रख सकेंगे कदम
सुप्रीम कोर्ट ने अनिल टुटेजा को जमानत देते हुए साफ कर दिया है कि वे बाहर रहकर जांच को प्रभावित नहीं कर सकते। अदालत ने उन पर निम्नलिखित सख्त शर्तें लागू की हैं:
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राज्य से बाहर रहने का आदेश: जमानत की अवधि के दौरान अनिल टुटेजा छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें राज्य से बाहर ही रहना होगा।
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अधिकारियों से संपर्क पर रोक: वे छत्तीसगढ़ सरकार के किसी भी मौजूदा या पूर्व सरकारी अधिकारी से किसी भी माध्यम से संपर्क नहीं करेंगे।
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पासपोर्ट जमा: उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट में सरेंडर करना होगा और वे बिना अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
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जांच में सहयोग: ईडी (ED) या अन्य जांच एजेंसियों के बुलाने पर उन्हें पूछताछ के लिए तुरंत उपस्थित होना होगा।
क्या है 3000 करोड़ का शराब घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के मुताबिक यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क ने शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमाई का विशाल सिंडिकेट तैयार किया।
ईडी के अनुसार इस कथित घोटाले से करीब 3000 करोड़ रुपए की गैरकानूनी कमाई हुई, जबकि ईओडब्ल्यू और एसीबी की चार्जशीट में अपराध से अर्जित रकम लगभग 2883 करोड़ रुपए बताई गई है। एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे अफसरों, नेताओं और कारोबारियों ने मिलकर शराब कारोबार को नियंत्रित किया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया…
सिंडिकेट में अफसर, नेता और कारोबारी
ईडी की जांच में जिस “सिंडिकेट मॉडल” का जिक्र किया गया है, उसने राजनीतिक गलियारों से लेकर नौकरशाही तक हलचल मचा दी थी। अब तक पीएमएलए की धारा 19 के तहत नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन एमडी, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं।

