रायपुर। नौकरी की तलाश में निकली लड़कियां और महिलाएं आज सिर्फ बेरोज़गारी से नहीं लड़ रहीं। वे उन लोगों से भी जूझ रही हैं जो सपनों को चारा बनाकर जाल बिछाते हैं। ताज़ा मामला राजधानी रायपुर से सामने आया है, जहां एक युवती को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पहले लाखों रुपये ऐंठे गए, फिर विश्वास का दुरुपयोग कर दुष्कर्म किया गया और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया।

आरोपी रितेश चंद्राकर (फर्जी एम्स कर्मचारी)

मामला आमानाका थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार 25 वर्षीय पीड़िता की पहचान दो साल पहले सोशल मीडिया के जरिए कवर्धा जिले के पांडातराई निवासी रितेश चंद्राकर (26) से हुई। आरोपी ने खुद को एम्स में कर्मचारी बताया, भरोसा जीता और नौकरी दिलाने का वादा किया।

6 लाख रुपये, फर्जी जॉइनिंग लेटर और टूटा भरोसा

आरोप है कि युवक ने अलग-अलग किस्तों में करीब 6 लाख रुपये वसूल किए। भरोसा पक्का करने के लिए फर्जी जॉइनिंग लेटर भी थमा दिए। युवती सपनों के साथ तैयारी करती रही।

इसी दौरान आरोपी ने उसे होटल में बुलाया, दुष्कर्म किया और वीडियो बना लिए। फिर वही वीडियो धमकी का हथियार बन गए। मानसिक दबाव, डर और शर्म—इन सबके बीच युवती चुप रही।

सच तब सामने आया जब वह जॉइनिंग लेटर लेकर एम्स पहुंची। जांच में दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकले। इसके बाद उसने हिम्मत जुटाई और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। ठगी, दुष्कर्म और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज है।

यह सिर्फ एक केस नहीं, एक चेतावनी है

यह कहानी नई नहीं है। पैटर्न वही है:

  • सोशल मीडिया पर संपर्क
  • बड़ी संस्था में नौकरी का दावा
  • भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज
  • पैसों की मांग
  • निजी मुलाकात का दबाव
  • और फिर शोषण या ब्लैकमेल

नौकरी की तलाश कर रही लड़कियां अक्सर “सॉफ्ट टारगेट” मानी जाती हैं। वजह साफ है—सपने, भरोसा और सामाजिक दबाव। अपराधी इन्हीं कमजोरियों पर वार करते हैं।

यहां समझिए क्या करें, क्या नहीं

  1. किसी भी सरकारी नौकरी के लिए पैसा देना अवैध है।
    सरकारी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होती है। कोई व्यक्ति निजी तौर पर “सेटिंग” का दावा करे तो तुरंत दूरी बनाएं।
  2. जॉइनिंग लेटर हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से मिलान करें।
    संस्थान की वेबसाइट या हेल्पलाइन पर सत्यापन करें।
  3. निजी मुलाकात से बचें।
    खासकर होटल या एकांत स्थान पर बुलाए जाने पर साफ मना करें।
  4. डिजिटल सतर्कता रखें।
    वीडियो कॉल, निजी फोटो या दस्तावेज साझा करने से पहले सोचें। एक बार सामग्री गलत हाथों में गई तो वापसी मुश्किल होती है।
  5. डरें नहीं, शिकायत करें।
    ब्लैकमेलिंग की स्थिति में चुप रहना अपराधी को मजबूत करता है। तुरंत पुलिस या साइबर सेल में शिकायत करें।

परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी

लड़कियों को “चुप रहो” कहना समाधान नहीं। उन्हें जानकारी, भरोसा और कानूनी समर्थन देना होगा। नौकरी की तलाश में निकली युवतियां कमजोर नहीं हैं, लेकिन अपराधियों की चालें संगठित और योजनाबद्ध होती हैं।

यह मामला एक सबक है। सपने देखिए, मेहनत कीजिए, लेकिन किसी के शॉर्टकट के वादे पर भरोसा मत कीजिए।

नौकरी का रास्ता आवेदन से जाता है, न कि किसी अजनबी के भरोसे से।
सतर्क रहें। सवाल पूछें। और जरूरत पड़े तो आवाज उठाएं।

 

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