दंतेवाड़ा। बचेली सरकारी शराब दुकान में हुए करोड़ों के हेराफेरी कांड ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही नए खुलासे पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। बचेली थाना पुलिस को दुकान से मिली काली डायरी अब इस घोटाले की सबसे अहम कड़ी बन गई है। सूत्रों के अनुसार डायरी में पांच–पांच पैसे तक का हिसाब दर्ज है, जिसमें बड़े अधिकारियों से लेकर स्थानीय सफेदपोश नेताओं तक की हिस्सेदारी का ब्योरा मौजूद है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने अब तक 1 करोड़ 52 लाख रुपये के लेनदेन की पूरी कहानी सार्वजनिक नहीं की है। डायरी में फ़ोनपे से किए गए कई ट्रांजैक्शनों का भी उल्लेख है, लेकिन पुलिस इस हिस्से को सामने लाने से बचती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि काली डायरी का पूरा सच सामने आ गया, तो जिले के कई बड़े नाम और वर्दीधारी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।
सूत्र यह भी बताते हैं कि आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक अजय शर्मा के जिस किराए के मकान में वह रहता था, वहां से भी पुलिस ने बड़ी रकम बरामद की थी, मगर इस रकम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया। यही वजह है कि पूरे जिले में तरह–तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैल रही हैं। लोग साफ कह रहे हैं कि “जांच वहीं रुकेगी जहां तक आरोपी चाहेगा… जांच के पन्ने खुले तो कई दिग्गज बेनकाब होंगे।”
घोटाले में रक्षक कंपनी का ‘भक्षक’ कॉर्डिनेटर भी शामिल
इस घोटाले में केवल आबकारी विभाग के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा देने वाली रक्षक सिक्योरिटी कंपनी के एक कॉर्डिनेटर का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने सुपरवाइजर दीपक यादव, आबकारी उपनिरीक्षक अजय शर्मा, और रक्षक कंपनी के कॉर्डिनेटर अंकित तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बताया जा रहा है कि अंकित तिवारी ने रकम को हड़पने की साजिश रची थी। पुलिस रिमांड पर कड़ी पूछताछ होने पर कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
इस प्रकरण में शामिल एक और आरोपी राकेश उईके पुलिस की पकड़ से अब भी दूर है। उसकी भूमिका घोटाले की परतें खोलने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुपरवाइजर दीपक यादव: बचेली का नया ‘नगर सेठ’
जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि सुपरवाइजर दीपक यादव बचेली में जुआ–सट्टा और ऐय्याशी के लिए कुख्यात था। वह शहर में इतना प्रभावशाली हो चुका था कि कई लोगों ने उसे बड़ी रकम ब्याज पर (4याज) दे रखी थी। स्थानीय व्यापारियों और धनाढ्य लोगों के साथ उसका लगातार बड़ा वित्तीय लेन–देन चलता था।
सूत्रों का दावा है कि दीपक यादव ने बचेली के निवासी पलाश मुखर्जी से भी भारी रकम ले रखी थी। यह लेन–देन ब्याज पर था या साझेदारी के रूप में — यह साफ नहीं हो पाया है। लेकिन चर्चा यह है कि जुए और सट्टे के धंधे में हिस्सेदारी को लेकर दोनों के बीच कोई बड़ी डील हुई थी, जिसके बाद कई बार दोनों के बीच विवाद भी सामने आए थे।
दीपक यादव द्वारा शराब दुकान की सरकारी आय को जुए, सट्टे और अय्याशी में झोंकने की पुष्टि कई सूत्र कर चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक इस पहलू पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
पुलिस पर उठ रहे सवाल, जनता में बढ़ी बेचैनी
पूरा शहर इस बात से हैरान है कि घोटाले की इतनी बड़ी रकम का चुपचाप लेन–देन कैसे संभव हुआ। लोग पूछ रहे हैं कि जब काली डायरी में साफ-साफ नाम दर्ज हैं, तो जांच क्यों धीमी है? क्या कुछ नामों को बचाने की कोशिश की जा रही है?
नसर उल्लाह सिद्धकी DSP दंतेवाड़ा
इस मामले में सभी बिंदुओं की जांच हो रही है, कॉर्डिनेटर, आबकारी इंस्पेक्टर और सुपरवाइजर की गड़बड़ी में मुख्य भूमिका है, साथ ही एक डायरी लेन देन की मिली हुई है जिस पर लेनदेन कई जगह कोडवर्ड से लिखा हुआ। जांच में जो भी तथ्य आते जायेगे। उस हिसाब से जांच आगे बढ़ेगी।

